उद्योगों के तीव्र विकास के लिए कच्चे माल की आसान उपलब्धता आवश्यकःजिन्दल

Easy availability of raw materials required for rapid development of industries: Jindal

आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने के लिए टैक्स की न्यूनतम दरों, रॉयल्टी, अन्य दायित्वों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करना जरूरी तभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए होगी मुकाबले की राह आसान
• उद्योगों के लिए बिजली की दरों पर भी ध्यान देना आवश्यक, एक्सचेंज और वितरण की दरों में बड़ा फर्क
• कोयले से गैस बनाने की तकनीक (सीजीपी) से देश को बहुत लाभ होगा क्योंकि कोयले से रासायनिक ऊर्जा तैयार की जाती है जो उद्योग-कृषि सभी के लिए लाभदायक

रायपुर, (media saheb.com) जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के चेयरमैन श्री नवीन जिन्दल ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को सरकार की दूरदर्शी सोच बताते हुए कहा कि इसके लिए उद्योगों का तीव्र विकास आवश्यक है और उद्योगों का त्वरित विकास कच्चे माल की आसानी से उपलब्धता पर निर्भर करता है।

श्री जिन्दल तेल एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्रालय के समन्वय से इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा “आत्मनिर्भर भारतः रसायन, पेट्रो-रसायन एवं इस्पात क्षेत्र के उद्योगों पर फोकस” विषय पर आयोजित डिजिटल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत जैसे दूरदर्शी कदमों की शुरुआत से स्टील सेक्टर उत्साहित है और वह उन अग्रणी क्षेत्रों में शामिल होने जा रहा है जिसके योगदान के बल पर आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
श्री जिन्दल ने कहा कि कोई भी उद्योग तभी आगे बढ़ सकता है जब उत्पादन की स्थितियां उसके अनुकूल हों। कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो, टैक्स की तार्किक और न्यूनतम दरें हो, रॉयल्टी व अन्य दायित्व भी इस तरह हों, जिससे हमारे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें और अपनी स्थायी जगह बना सकें।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्थायी विकल्प दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। सौर, वायु, पनबिजली जैसे अक्षय ऊर्जा के साधनों के विकास से अगले 30 साल बाद कोयले का इस्तेमाल न्यूनतम हो जाएगा इसलिए हमें कोयला ब्लॉक की नीलामी कर जल्द से जल्द आत्मनिर्भर भारत के अपने लक्ष्य को पाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि भारत में थर्मल कोयले का अथाह भंडार है। उन्होंने लौह अयस्क खदानों के बारे में भी ऐसी ही राय दी और ओडिशा सरकार की पारदर्शी नीतियों को सराहते हुए अन्य राज्यों को उससे प्रेरणा लेने को कहा।

उनके अनुसार अगले 30 साल में पूरी दुनिया में लोहा-इस्पात का इतना अधिक उत्पादन हो जाएगा कि खदानों के बजाय स्टील की रिसाइक्लिंग प्राथमिकता हो जाएगी इसलिए आत्मनिर्भर भारत मिशन का उपयोग कर भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहिए। कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा तो निश्चित रूप से उद्योगों का विस्तार होगा और कर की दरें तार्किक होंगी तो निसंदेह वस्तु सस्ती होगी और उसकी पहुंच अधिकतम व्यक्ति तक सुनिश्चित होगी।
श्री जिन्दल ने कहा कि उद्योगों को चलाने के लिए बिजली सस्ती होनी चाहिए। एक्सचेंज में डेढ़ रुपये में मिलने वाली बिजली फैक्टरी तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

कोयले से गैस बनाने की तकनीक (सीजीपी) पर प्रकाश डालते हुए नवीन जिन्दल ने कहा कि इससे सिंथेसिस गैस तैयार होती है, जो हाइड्रोजन और कार्बन मोनो ऑक्साइड का मिश्रण होती है। इस रासायनिक ऊर्जा से पेट्रोलियम उत्पाद, मेंथा, डीजल, अमोनिया समेत अनेक प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं जो स्टील के साथ-साथ तेल एवं प्राकृतिक गैस, कृषि, उर्वरक व अन्य उद्योगों के लिए लाभदायक हो सकता है।

राष्ट्र निर्माण में जेएसपीएल के योगदान पर उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी ने देश को कई उत्पाद सबसे पहले दिये। इनमें पैरलल फ्लैंज बीम, स्लैब कास्टर, 5 मीटर चौड़ी प्लेट, मेट्रो के लिए हेड हार्डेंड रेल और एसिमेट्रिक रेल्स प्रमुख हैं। इसी तरह जेएसपीएल रेल पटरियों की निजी क्षेत्र की एकमात्र निर्माता है। जेएसपीएल ही वह कंपनी है जिसने जिन्दल पावर लिमिटेड के रूप में निजी क्षेत्र के स्वतंत्र बिजली संयंत्र का तोहफा सबसे पहले राष्ट्र को दिया और उससे प्रेरित होकर आज दर्जनों पावर प्लांट संचालित हो रहे हैं एवं देश बिजली क्षमता के मामले में सम्मानजनक स्थान पर है।

इस वेबीनार में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विचार प्रकट कर सरकार की आत्मनिर्भर भारत संबंधी नीतियों को बताया और कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन 2024 तक 31 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा। उनके अतिरिक्त ओडिशा के उद्योग मंत्री दिब्य शंकर मिश्रा, ओडिशा के उद्योग सचिव हेमंत शर्मा, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के श्रीकांत माधव वैद्य, आरआईएनएल के प्रदोश कुमार रथ आदि ने इस डिजिटल कॉन्फ्रेंस में भाग लिया।

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