एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट फ्लिपकार्ट के अलावा ऐमजॉन को भी भेजे नोटिस

Apart from Flipkart, Enforcement Directorate also sent notices to Amazon

रायपुर, (media saheb.com) कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू,  अमर गिदवानी,  प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन,  कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी संजय चौंबे ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा फ्लिपकार्ट को भेजे गए नोटिस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा की यह एक बहुप्रतीक्षित सही कदम है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  श्री अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री जितेन्द्र दोशी ने कहा की अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों अपने-अपने मार्केटप्लेस पर अपने पसंदीदा विक्रेता प्रणाली का संचालन कर रहे हैं जो ई-कॉमर्स नीति में एफडीआई के नियमों के खिलाफ है जिसके लिए कैट एक लम्बे समय से अपनी आवाज उठा रहा था। उन्होंने कहा की हम प्रवर्तन निदेशालय से अमेज़न को भी इसी तरह का नोटिस भेजने की मांग करते हैं, क्योंकि अमेज़न और फ्लिपकार्ट दोनों ही एक ही नाव में सवारी कर रहे हैं।
श्री पारवानी और श्री दोशी दोनों ने ईडी के इस कदम का स्वागत किया और कहा कि अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट द्वारा वर्ष 2016-2021 की अवधि के बीच सरकार के कानूनों के उल्लंघन की जांच की जानी चाहिए। श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि ईडी को केवल भारी जुर्माना ही नहीं लगाना चाहिए, बल्कि सरकार को अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों के पोर्टलों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करनी चाहिए जब तक कि वे एफडीआई कानूनों का अक्षरशः पालन नहीं करते।
श्री पारवानी एवं श्री दोशी ने कहा की फ्लिपकार्ट के मामले में डब्ल्यूएस रिटेल कम्पनी का स्वामित्व सचिन बंसल और बिन्नी बंसल दोनों के पास था और यही कम्पनी फ्लिपकार्ट के कारोबार का के एक बड़े हिस्से के द्वारा बेच रहा था, जबकि अमेज़ॅन के मामले में ज्यादातर सामान क्लाउडटेल और अप्पारियो द्वारा बेचा जा रहा है, जहां अमेज़ॅन की इक्विटी हिस्सेदारी है। चूंकि दोनों ही मामलों में बेचने वाली पार्टियां मार्केटप्लेस की संबंधित कंपनियां हैं, इस वजह से अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों ने ई-कॉमर्स कानून में एफडीआई का उल्लंघन किया है।
श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि ई-कॉमर्स नीति में एफडीआई के तहत विदेशी वित्त पोषित कंपनियां केवल प्रौद्योगिकी सुविधा प्रदान करने वाले बाज़ार के रूप में कार्य कर सकती हैं, और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से माल नहीं बेच सकती हैं जबकि ये कंपनियां इन्वेंट्री मोड में भी काम कर रही थीं जो नीति के तहत प्रतिबंधित है और इसलिए ईडी द्वारा नोटिस भेजना किसी भी मायने में गलत नहीं है।For English News : the states.news

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