कैट ने वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयल से प्रेस नोट 2 के स्थान पर नए मजबूत प्रेस नोट को तुरंन्त जारी केरने की मांग की

CAT demanded Commerce Minister Piyush Goyal to immediately issue a new strong press note in place of press note 2.

रायपुर (mediasaheb.com) कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी संजय चैबे ने बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल को भेजे गए पत्र में ई-कॉमर्स व्यापार एफडीआई नीति के प्रेस नोट नंबर 2 के प्रावधानों को बेहद साफ तरीके से स्पष्ट करते हुए नए प्रेस नोट के जल्द जारी करने की मांग की है जिससे विदेशी धन से पोषित ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी और व्यापारिक कुप्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने बताया कि श्री गोयल को भेजे पत्र में ई कॉमर्स पोर्टल की किसी भी कम्पनी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष इक्विटी भागीदारी या आर्थिक हित हो   बाजार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए ई कॉमर्स को समान प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र, खाद्य पदार्थों में इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स  कंपनियों द्वारा  मल्टी ब्रांड रिटेल के जरिये खाद्य सामग्री बेचना आदि को प्रेस नोट 2 में स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है की  ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा कानून और नीति का पालन किया गया है यह देखने के लिए हर ई कॉमर्स कम्पनी का समय समय पर कानून पालन ऑडिट का प्रावधान भी हो वही दूसरी तरफ हर प्रकार के ई कॉमर्स व्यापार करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय से हर कम्पनी का पंजीकरण भी अनिवार्य किया जाए।
कैट सी.जी. चैप्टर के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री विक्रम सिंहदेव ने कहा कि ई-कॉमर्स का दायरा स्पष्ट रूप से सभी प्रकार की सेवाओं जैसे यात्रा, एयर बुकिंग, कैब सेवाओं, ऑनलाइन खाद्य वितरण या ऑनलाइन मोड के माध्यम से तथा किसी भी प्रकार से वस्तुओं या सेवाओं की ऑनलाइन आपूर्ति को ई कॉमर्स के दायरे में रखा जाना स्पस्ष्ट किया जाए । देश भर में सैकड़ों विदेशी वित्त पोषित कंपनियां सामान और सेवाएं ऑनलाइन के जरोये प्रदान कर रही हैं लेकिन क्योंकि उनका कोई लेखा जोखा सरकार के पास नहीं हैं इसलिए वो अब तक अब तक ई-कॉमर्स नीति के दायरे से बाहर हैंऔर ई कॉमर्स व्यापार को विषाक्त कर रही हैं।
श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रेस नोट 2 के खंड 2.1.25 में  संबद्ध, संबंधित पक्षों, संबंधित कंपनियों, बाजार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित किसी भी कंपनी को शामिल करना,  जहां बाजार में ई कॉमर्स पोर्टल की  प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से या आर्थिक भागीदारी हो उसे ई कॉमर्स पोर्टल की समूह कंपनी के रूप में माना जाना चाहिए। उन्होंने ई-कॉमर्स और मार्केटप्लेस आधारित मॉडल ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री आधारित मॉडल को स्पष्ट करने के लिए प्रेस नोट के खंड 5.2.15.2.2 में संशोधन की मांग की है। कैट ने सभी स्टेकहोल्डर्स  के लिए समान प्रतिस्पर्धा क्षेत्र के रूप में सुनिश्चित करने के लिए खंड 5.2.15.2.4 पर स्पष्टता मांगी है।
श्री सिंहदेव ने कहा कि स्वचालित खंड के तहत विनिर्माण क्षेत्र के लिए खंड 5.2.5.1 में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है और ई-कॉमर्स के माध्यम से भारत में निर्मित अपने उत्पादों को बेचने की अनुमति है। इन्वेंट्री मॉडल में कुछ विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां 5.2.5.2 के क्लॉज को अपनी सुविधा के हिसाब से चयनात्मक तरीके से व्याख्या करते हुए इस प्रावधान की आड़ में ई-कॉमर्स में किराना और फूड बेच रही हैं, जो एफडीआई नीति का घोर उल्लंघन है। इस प्रकार के पिछले दरवाजे के प्रवेश को बंद करना आवश्यक है।(the states. news)

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